वैश्विक स्तर पर भारतीय स्टार्ट-अप्स का उदय

वैश्वीकरण के युग में आज भारत अपने विकासशील राष्ट्र की पहचान से आगे बढ़ कर एक विश्व नेता के रूप में उभर रहा है। हाल के वर्षो में विश्व स्तर पर भरत ने अपने गहन जुझारूपन और कूटनीति का शानदार प्रदर्शन किया है। नई प्रवृत्ति में उभरती विश्व राजनीति से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उलझन की स्तिथि होने के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था स्थिर रखने में कायम है। इसका श्रेय बहुत हद तक भारत में प्रगतिशील नई उद्यमों को जाता है, हमारे देश की नई स्टार्ट-अप संस्कृति को जाता है। हाल के वर्षों में हमने अपने देश में स्टार्ट-अप संस्कृति को शानदार प्रगति से बढ़ावा दिया है। आज भारतीय उद्यमों के कई ऐसे कंपनियां हैं जो वैश्विक स्तर पर अपनी श्रेष्ठता और नवीनता को साबित करते हैं। फ्रेशडीस्क, इनमोबी, आईयोगी, पब-मैटिक, सपोर्टबी, वॉलेटकिट, जोहो (Freshdesk, InMobi, iYogi, PubMatic, SupportBee, WalletKit, Zoho), भारतीय उन्नयन के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं। स्टार्ट-अप इकोसिस्टम्स पर नवीनतम NASSCOM रिपोर्ट (2016), भारत को तीसरी सबसे बड़ी स्टार्ट-अप बेस की घोषणा करता है, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन के क्रमशः 4100 और 3500 और भारत के लगभग 3100 स्टार्टअप हैं। महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय उद्यमों की संख्या और बाज़ार कैप्चर दर अन्य विकसित देशों के मुकाबले अधिक अग्रसर है। भारत का विकास सालाना नये 800 से 1000 स्टार्टअप के साथ शीर्ष राष्ट्रों में सबसे तेज़ है। 2020 तक गिनती 2000 तक पहुंचने की उम्मीद है, जहां भारतीय उद्यम ब्रिटेन और अन्य देशों को महत्वपूर्ण बढ़त के साथ पीछे छोड़ देगा।

वैश्विक  मानकों के आधार पर, भारत के घरेलू सीमाओं में कार्यान्वयन उद्यमों और कई देशों में व्यापर वाली भारतीय कंपनियों (Indian MNC’s) के बीच काफी भेद है। फर्म को प्रबंधित करने की प्रक्रियाओं, ग्राहकों की विशिष्ट जरूरतों को प्राथमिकता और उद्यमों के हितों को बनाए रखने के मामलों में बड़ा अंतर है। एक विश्वव्यापी स्टार्ट-अप वो है जिनकी उत्पाद या  सेवा का लाभ कई देशों में लिया जा रहा हो। ऐसे में नए स्टार्ट-अप उद्यमों को किसी विशेष देश में अपने लक्षित ग्राहकों की बुनियादी इच्छाओं की समझ और फल स्वरूप नीति निर्णय  बहोत महत्वपूर्ण है। वैश्विक बाजार में विशिष्ट वर्ग-आधारित ग्राहकों की मूल उपयोगिता को साधने की क्षमता पर स्टार्ट-अप्स की सफलता काफ़ी हद तक निर्भर होती है।

भारतीय स्टार्ट-अप्स ने हाल के दिनों की डिजिटल और गैर-डिजिटल प्रगति पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया है। आधुनिकीकरण अनुसार हमारे उद्योगों ने विशेष क्षेत्रों जैसे डिजिटल मार्केटिंग, विश्लेषिकी,गतिशीलता,  मशीन स्पेशलाइजेशन, आईओटी (IOT- इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) और  क्लाउड कंप्यूटिंग में सम्मानित विकास किया है। विश्व के तमाम शीर्ष बड़े उद्योग जैसे माइक्रोसॉफ्ट, प्रोक्टर एंड गैंबले, नेस्ले, अमेज़न, सीट्रिक्स, कोका-कोला, पे-पल, आईबीएम के भारत में सुचारु मुख्यालय हैं। बेंगलोर, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, पुणे, चंडीगढ़ और हैदराबाद इन कंपनियों की पहली पसंद है। गूगल, फेसबुक और उबर (Google, Facebook and Uber) जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सफलता ने भारत के युवाओं को प्रेरित किया है। अपनी उद्यमी क्षमता के साथ दुनिया को अपना लोहा मनवाने के लिए भारतीय युवक आत्मविश्वास और आवेग के साथ नए डिजिटल युग में प्रगतिशील हैं।

हालिया बाजार-प्रवृत्ति में एक सफल उद्यम के लिए नवाचार, विश्वसनीयता और विशिष्टता के साथ प्रभावी रणनीति सबसे महत्वपूर्ण है। आज लगभग 43% नए बढ़ते भारतीय संगठन वैश्विक बाजार पर ध्यान देते हैं। बाजार को बढ़ावा देने के परिणाम स्वरूप डिजिटल,गैर-डिजिटल और सेवाओं सहित भारतीय उपभोक्ता उत्पादों का अवलोकन दर्शाता है कि दुनिया भर में कार्यरत ऐसे संगठनों का मूल्यांकन सर्वोत्तम है।  हमारे देश का विविधीकरण कई स्टार्ट-अपों के लिए आम तौर पर बाधाओं के रूप में कार्य करता है। लेकिन भारतीय उद्योगों की एक विशेष पहलू यह है की हमारी विविधता ही हमारी ताक़त है। भारत में शुरू होने वाली नयी कंपनियों को आमतौर पर देश के भीतर बड़े बाज़ार और उनसे उत्त्पन्न होने वाली अवसरों का अनुभव मिलता है। भारतीय बाज़ारों की चुनौती अलग-अलग वरीयताओं के साथ विशाल ग्राहक आधार को संभालने के कौशल और विशेषज्ञता की स्थापना करने में और अपने व्यवसाय को अन्य विविध बाजारों में फैलाने में मददगार है।

भारत में राजनीतिक शासन  और नौकरशाही व्यवहार में व्यवस्थित है, इस में कोई दो राय नहीं है। किसी एक संगठन और उसके संचालन की स्थापना का पूरा ढांचा, अर्थात व्यापार करने में आसानी(ease of doing business) देश के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में बेहद निराशाजनक और असमान है। वर्तमान केंद्रीय सरकार अनुकूल कारोबारी माहौल को समृद्ध करने से संबंधित योजनाओं, नीतियों और संशोधनों को लागू करके भारत में उद्यमी उन्नति को बढ़ावा देने में प्रभावी है। राष्ट्र में विकास और स्टार्टअप के समर्थन के लिए एक ठोस ढांचा तैयार करने का लक्ष्य के साथ माननीय प्रधानमंत्री ने 16 जनवरी, 2016 को नई दिल्ली में स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान की स्थापना की। इन क़दमों के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को उन्नति और भारत में उद्यमशील विकास के प्रसार को प्रोत्साहित करना ही सरकार का प्रयास है। वर्तमान में स्टार्टअप इंडिया सेंटर प्वाइंट में 32,587 पूछताछ से निपटने की और 190 से अधिक स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की क्षमता है। नई कंपनियां जो 1 अप्रैल, 2016 के बाद शामिल किये गए हैं वे  अब पांच साल के बजाय सात वर्षों में तीन साल के कर की छुट्टी का लाभ ले सकते हैं। आईआईटी गांधीनगर में रिसर्च पार्क की स्थापना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अधिकृत की गई है। इस योजना के तहत वर्तमान में 90 करोड़ रुपये और अंतराल के हिस्से में 40 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। हाल ही में केंद्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थानों में ऊष्मायन केन्द्रों (incubation centers) की स्थापना के लिए घोषणा किए गए हैं।

वैश्विक दृष्टिकोण से भारत के लिए अपनी राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में सुधार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के  अनुकूल खुद को साबित करना सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। इसके लिए हमारी व्यापारिक उद्यमों की विचारधारा को समय के साथ विकसित होना होगा। बदलाव से निपटने के लिए नई कंपनियों को परंपरागत कार्यशैली से आगे बढ़कर अभिनव प्रयास और नवाचारों को प्रोत्साहित करना  ही समय की मांग है।

Aman

Arivaan is a collection of thoughts that pertain within and get converted into writings. The word Arivaan itself is a creation of my imagination. If I think of giving a meaning to it then most appropriate would be imaginations turning reality.

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